हम सब अपराधी हैं
हम समाज को दोष देते समय
एक उंगली सामने की ओर उठाते हैं
तो तीन उंगलियाँ हमारे अपनी तरफ होती हैं
हाँ हम सब अपराधी हैं, भ्रष्ट हैं
आईने के सामने खड़े हो कर
क्या हम स्वयं से नजरें मिला पाते हैं?
कितना सहज है उपदेश और गलियाँ देना
कितना कठिन है आदर्शों पर चलना
हम ही तो हैं जो बिना तैयारी के कक्षा में जाते हैं
और किस्सों से विद्यार्थियों को बहलाते हैं
हम समाज को दोष देते समय
एक उंगली सामने की ओर उठाते हैं
तो तीन उंगलियाँ हमारे अपनी तरफ होती हैं
हाँ हम सब अपराधी हैं, भ्रष्ट हैं
आईने के सामने खड़े हो कर
क्या हम स्वयं से नजरें मिला पाते हैं?
कितना सहज है उपदेश और गलियाँ देना
कितना कठिन है आदर्शों पर चलना
हम ही तो हैं जो बिना तैयारी के कक्षा में जाते हैं
और किस्सों से विद्यार्थियों को बहलाते हैं

आज मूड नहीं क्लास लेने का बिना परवाह किये
कि हमारे एक घंटे क्लास न लेने से
साठ विद्यार्थियों के साठ घंटे बर्बाद हो जायेंगे
क्या यह भ्रष्टाचार नहीं?
अपने बच्चे को एडमिशन और नौकरी दिलाने के लिए
या मनचाही जगह पर स्थानांतरण के लिए
रिश्वत देने के लिए कौन जिम्मेदार है?
हममें से ही कोई इंजिनियर सड़कें,पुल और बिल्डिंग बनाते समय
सीमेंट की जगह बालू मिलाता है
और उसके ध्वस्त होने पर देश को कोसता है
हममें से कोई डॉक्टर बेवजह मरीजों की

और डाइगनोस्टिक सेंटरों से मोटा कमीशन खाता है
क्या यह भ्रष्टाचार नहीं?
हममें से कोई एक पुलिस ऑफिसर
अपने कर्त्तव्य से विमुख हो जाता है
उसकी ऑंखें तब खुलती हैं
जब किसी महिला के अस्मत और जिंदगी दांव पर लग जाती है
और उसकी नौकरी पर बन आती है
अपने उच्चाधिकारियों और प्रभावशाली लोगों को
हम मोटे उपहार देते हैं
की हमारा काम आसानी से होता रहे
अपने घर का कचरा साफ़ कर
सामने गली और सड़क पर डालने वाले
हम चिल्लाते हैं कि देश गन्दा है

अनाचार ,दुराचार , भ्रष्टाचार और अत्याचार
हम करते हैं और मौन हो सहते हैं
क्या हम सब अपराधी नहीं?
इस बीमार देश को और बीमार करने के?