Tuesday, February 21, 2012

पापा को-जन्मदिवस पर

सोचती रही
क्या करूँ?
आपके जन्म दिवस पर 
प्यारे पापा
खरीदूं कोई कीमती तोहफा?
मगर वह उस जिंदगी से 
ज्यादा कीमती कहाँ हो सकता है
जो आपने मुझे  दी?
लाऊं कोई बड़ा ,महंगा कार्ड?
सुन्दर सुन्दर शब्दों से सजा?
मगर वे शब्द उनसे सुन्दर कहाँ हो सकते हैं
जो आपने मुझे सिखाये?
मुझे अभी भी याद है
वो गुलाबी फ्राक 
जो आपने पार्सल की थी
मेरे जन्म दिवस पर
जब आप शहर में नहीं थे
कोई भी पार्सल क्या ज्यादा खुबसूरत 
हो सकता है
उस मधुर स्मृति से?
आपने मुझे उंगली पकड़ कर 
चलना ही नहीं सिखाया
बल्कि हिम्मत और ताकत भी दी
ऊंचे आकाश में उड़ने की
हर परिस्थिति में 
आपका शर्तविहीन प्यार और सहारा
आज मेरी ज़िन्दगी का संबल है
कुछ भी बड़ा नहीं हो सकता
इन सबसे-आप से
मेरी क्षमता सिर्फ तीन शब्द कहने की है
पूरे दिल से
हैप्पी बर्थ डे-प्यारे पापा

4 comments:

  1. बहुत ही छूते हुए शब्द, उस वक़त ka चित्रण कर रहे हैं. जब कोई गुडिया रानी , जिम्मेदारी, जबाबदेही, और सामाजिकता से परे.....अपने पिता के साये में चहक रही होती है और ........ जहाँ उसकी मासूमियत महफूज रहती है.

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    1. धन्यवाद कंचन जी !

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  2. सबसे पहले तो जन्‍मदिन की ढेर सारी बधाई ...और यह रचना जिसके शब्‍द दिल की गहराईयों से निकले हैं भावमय कर गई ...बेहतरीन अभिव्‍यक्ति ।

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  3. very nice....happy birthday to uncle.

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